अनंत की अमराइयों से
तादात्म्य स्थापित कर ,
मानवीय जगत को
पावन स्नेह का अवदान देने वाली ,
पलकों में रची -बसी
दिवंगता लाडली बिटिया 'प्रियंका' की पुण्य- स्मृति में
यह अश्रुसिक्त काव्यांजलि...........
दीप की देह में यदि नेह है, जलन भी है।
देह के नेह को श्रृंगार है, कफ़न भी है।
ज़िन्दगी नाम नहीं सिर्फ़ मुस्कुराने का,
उम्र की राह में बहार है, घुटन भी है।
